Posted by: prithvi | 14/01/2013

चलो कि रुदालियों को आना है

निराशा की धुंध में उम्‍मीदों का सूरज तलाशते इस मौसम में भी आरोन (Aaron Swartz) का चले जाना धोखा सा लगता है. मैं इस खबर पर विश्‍वास ही नहीं करना चाहता कि 26 साल के इस बंदे ने दो दिन पहले आत्‍महत्‍या कर ली. आरोन की मौत, इंटरनेट विशेषकर आनलाइन ज्ञान पर सबके अधिकार की लड़ाई के लिए झटका ही नहीं बल्कि इस बात का एक और पुख्‍ता सबूत है कि सारे सिस्‍टम गैरबराबरी के लिए बने हैं चाहे अमेरिका हो या भारत. साथ ही यह घटना बताती है कि किसी भी संवेदनशील युवा के लिए हमारी समाज की जमीन कितनी प‍थरीली हो चुकी है.

शायद यह इंटरनेट पर सेंसरशिप संबंधी अमेरिकी कानून सोपा के खिलाफ अभियान संबंधी कोई खबर थी जब पहली बार इस नौजवान का नाम पढ़ा. फिर उसकी प्रोफाइल देखी तो उसके नाम के आगे कंप्‍यूटर प्रोग्रामर, साफ्टवेयर डेवल्‍पर, लेखक, राजनीतिक कार्यकर्ता, इंटरनेट एक्टिविस्‍ट और कंप्‍यूटर का चमत्‍कार जैसे कई विश्‍लेषण थे. तेरह चौदह साल की उम्र में उसने आरएसएस की शुरुआती लिपि‍ लिखी और रेडिट कंपनी का सह संस्‍थापक बना. उसने विकीपीडिया से पहले ही नि:शुल्‍क आनलाइन इनसाइक्‍लोपीडिया बना दिया था. बाद में इस क्षेत्र में उसने क्‍या नहीं किया. कंप्‍यूटर महारथी के रूप में, इंटरनेट की आजादी के समर्थक और ज्ञान पर सबके समान अधिकार के आंदोलनकर्ता के रूप में. ज्ञान के संसाधनों की आजादी और उनके इस्‍तेमाल में समानता के लिए उसकी प्रतिबद्धता व लड़ाई मानीखेज है. ज्ञान को अपनी बपौती समझने और इससे बड़ी कमाई कर रही कंपनियों तथा येन प्रकरेण इंटरनेट की आजादी को सीमित करने के प्रयासों में लगी सरकारों के खिलाफ उसकी हुंकार मायने रखती थी.

aaron-swartz

सोपा के खिलाफ लड़ाई का आगाज करते हुए आरोन ने कहा था कि इंटरनेट के जरिए संपर्क की आजादी ठीक वैसे ही है जैसे अभिव्‍यक्ति की आजादी जो हमें संविधान देता है. उसने कहा था कि नयी प्रौद्योगिकी ने आजादी को नये रंगरूप में हमारे सामने पेश किया है जो कहीं अधिक गहरी व मजबूत, मानीखेज है. वह वैश्विक सूचना संसाधनों के इस्‍तेमाल में समानता व आजादी का घोर समर्थक था.

पिछले साल इन्‍हीं दिनों उसे जेस्‍टर के आनलाइन संग्राहलय से अकादमिक जर्नलों को कथित अवैध रूप से डाउनलोड करने के लिए गिरफ्तार कर लिया गया. कहते हैं कि इसके बाद बार बार की पुलिसिया पूछताछ और व्‍यक्तिगत त्रासदियों के चलते वह जमाने और व्‍यवस्‍था से लगातार निराश होता गया और उसे लगा कि जीने का कोई मकसद नहीं है. इस तरह से एक और प्रतिभा समय से पहले मिली प्रसिद्धि की दुश्‍वारियों की बेली चढ़ गई. रपटें बताती हैं कि समय के साथ आरोन बाहर से चर्चित और अंदर से अकेला होता गया. लेकिन उसने अपने दोस्‍तों को जी भर कर प्‍यार किया. उम्र में कहीं बड़ी क्विन से प्‍यार हुआ, रिश्‍ता रखा और एक अदद गुरू, साथी की तलाश में भटकता रहा. साल भर पहले जब से अमेरिकी सरकार उसके पीछे पड़ी उसके भीतर निराशा गहराती गई और अंतत: उसने अपने जीवन के सिस्‍टम को शटडाउन कर दिया.

उसका यूं चले जाना एक कथित भरे पूरे समाज और दुनिया की सबसे भरपूर ताकतवर सरकार के मुंह पर तमाचा है. एक समाज जो अपनी संभावनाशील प्रतिभाओं को सहेज नहीं पा रहा और अधिकारों के नशे में चूर सरकार, प्रतिभाओं से खिलवाड़ करती है.

26 साल.. यह कोई जाने की उम्र नहीं होती. डब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यूडब्‍ल्‍यू का विकास करने वाल सर टिम बर्नर्स-ली ने आरोन के निधन पर कहा,’हम में से एक कम हो गया, हमारा एक बच्‍चा चला गया, चलो रो लेते हैं.’ आरोन की लंबे समय तक साथी रही क्विन ने उसे याद करते हुए डब्‍ल्‍यू एच आडन की एक कविता का जिक्र किया है…

Stop all the clocks, cut off the telephone,
Prevent the dog from barking with a juicy bone,
Silence the pianos and with muffled drum
Bring out the coffin, let the mourners come.

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Responses

  1. ऐसा लगता है कि कोई व्यक्तिगत क्षति हुई है।
    व्यवस्था के पथरीले किले वातायनों के विरोधी हैं। वे अपने करीब पल रहे लोगों की रोशनी को चुरा लेना लेना चाहते हैं इसलिए सदा उन्हें रोंदाते हुये ऊपर की ओर भी बढ़ते रहे हैं। ज्ञान को लेकर हम सब में कई तरह के संस्कार हैं। जैसे भारतीय वेदों और उस काल की चिकत्सा का ज्ञान सिर्फ अपनों को ही दिये जाने की सोच के कारण विलोप हो गया। आज हम इस उद्धरण को भूल कर कोई अच्छा काम नहीं कर रहे हैं। ज्ञान को जितना बांटा जाएगा वह उतना ही परिष्कृत होगा मगर महल दो महलों वाले जानते हैं कि ज्ञान व्यवस्था से वे सुख छीन लेता है जिसे हम राज कहते हैं।

    विदा दोस्त !

  2. मैं आरोन से परिचित नहीं था लेकिन आज तुमने मुझ उस व्यक्ति से रू ब रू करवाया जो वास्तव में जीनियस था। मुझे लगता है कि ऐसे इन्सानों की ईश्वर को भी जरूरत होती है। विवेकानंद, जान कीट्स त​था और भी कई।

  3. maine Aaron ke baare mein thora bahut padha tha lekin aapne jis tarike se unke kaam se parichit karaya , tab jakar main gyan ke us prasarak ko samajh paya. Ye aaj ki trasadi hai jo lagatar ghat rahi hai aur umr ka koi takaja nahin hai. Alvida dost !

  4. SMAJ ME JO VRCHSWSALI LOG HAI UNHE SOCHNA CHAHIYE KI MANV JIWN ME SMSYA KA SMADHAN MHTWPURN HAI : TRASDI NHI . RITI-RIWAJ , PRMPRA , PAKHAND ETYADI KE NAM PR SOSN KBTK CHLTA RHEGA ? MANV JNMJAT PREM KA PUJARI HAI .

    ESTRH KI GHTNA SE VAISWIK MANV SMAJ KI HANI HAI .

    ” PHLE LACHAR KRO , PUNH WYAPAR KRO ” SOSN KE TRASDI MNTR KO BND KRKE ” SMSYA KA SANTIPURN SMADHAN ” KI NITI KA ANUSRN KRKE MANAVTA KA KLYAN SMBHAV HAI .


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