Posted by: prithvi | 31/01/2011

धान कथावां: उम्‍मीदों की पौध

रोपता हूं

धान- पनीरी

इनसे

कभी तो उगेंगी

धान कथाएं।

पनीरी- पौध. नए साल की शुरुआत ऐसी ही कुछ उम्‍मीद जगाने वाली पंक्तियों से हो इससे बेहतर पठन में क्‍या हो सकता है. राजस्‍थान के साहित्‍य गांव परलीका के मास्‍टर साब यानी सत्‍यनारायण सोनी की नयी पोथी ‘धान-कथावां’ (राजस्‍थानी में) इन्‍हीं दिनों आई है जिसमें इसी उम्‍मीद में पौध रोपी गईं हैं कि कभी तो उनसे कथाएं उगेंगी. और इस छोटी सी किताब को पौध के रूप में ही लिया जाएगा क्‍योंकि इसमें उनके लेखकीय कौशल की झलक भर मिलती है.

बोधी प्रकाशन ने एक बार फिर साधुवाद लायक काम किया है.  मात्र 25 रुपये में किताब जिसमें यात्रा संस्‍मरण, कहानियां जैसी विधाओं की रचनाएं हैं. उनकी रचनाओं की खास बात कि यह भी गांव और उनकी तरह सीधी साधी और सरल हैं. सहज हैं. बहुद हद तक कोई लाग लपेट दुराव नहीं. वे अपने लेखन में बड़ी बड़ी बातें नहीं बांधते बस छोटी छोटी बातों से बड़े, गहरे संकेत देते हैं. एक बार में ही पढने लायक किताब जिसमें संस्‍मरणों, छोटी छोटी घटनाओं को कहानियों के रूप में पिरोया गया है.

प्रेम चंद गांधी ने लेखक के बारे में लिखा है- उनकी कहानियां आसपास के ग्रामीण परिवेश में फैली विसं‍गतियों और विद्रूपताओं को बहुत खूबसूरती के साथ बयान ही नहीं करती, बल्कि पाठक को झिंझोड़ देती है. डा अर्जुनदेव चारण का कहना है कि सत्‍यनारायण सोनी की कहानियां कई जगह अपनी चुप्‍पी के कारण भेद भरी दुनिया रचती हैं और इसी चुप्‍पी को तोड़ने के कवायद पाठक को एक नये संसार में ले जाती है.

उनके लेखन की विशेषता सहजता, सरलता है. यह किताब ऐसे समय में आई है जबकि राजस्‍थानी को लेकर सिर्फ बातें ही की जा रही हैं.  इस लिहाज से भी यह मायने रखती है. सत्‍यनारायण सोनी के लेखन की यह पनीरी या पौध है, फसल अभी आनी है. वे राजस्‍थानी के सबसे प्रतिभावान, ऊर्जावान लेखकों में से एक हैं इसलिए उनसे इससे कहीं बेहतर की उम्‍मीद है.


किताब आनलाइन यहां उपलब्‍ध है क्लिक करें

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Responses

  1. धान- पनीरी

    इनसे

    कभी तो उगेंगी

    धान कथाएं।..
    शानदार खेतों में उन्गेंगे अब कहानिया…बेहतरीन…..पता नहीं हमने अपने खेत में धान रोपें हैं….कहानियां रोपने की कल्पना नहीं की थी …हो सकता है कहानियां गर खेतों में रोपी जाने लगें तो उसकी बालियों में लगी नन्ही नन्ही कहानियां…सच में अपने आप में शानदार होंगी…बरहाल मुझे ये बताया जाए..ये खेतों में रोपी गई कहानी किस स्टोल पर मिलेगी या कैसे मेरे पास पहुचेगी….अब तो इसे पढ़े बिना तसल्ली मुझे नहीं मिलने वाली………..

  2. नमस्कार
    सत्य नारायाण सोनी जी ने मोकली मोकली बधाई ! अर ” बोधी प्रकाशन ” ने घनो आभार के बिया फगत @ 25 में पोथी पढ़निया सामी राखी है .
    बधाई !

  3. सोनी जी अर बोधि प्रकाशन नै घणी घणी बधायाँ …सुभ्काम्नावां

  4. भाई पृथ्वी,
    डा.सत्यनारायण सोनी की ताजा कता पोथी “धान कथावां” पर आपकी टिप्पणी बडी़ सटीक है !
    वाकई यह कथा संग्रह गज़ब है !राजस्थानी कथा यात्रा की अगली कडी़ है यह कृति !


कुछ तो कहिए..

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