Posted by: prithvi | 16/06/2010

शब्‍दों का पर्व

जयपुर का बोधि प्रकाशन कोई बड़ा संस्‍थान नहीं है. लेकिन 100 रुपये में दस किताबें देने की उसकी योजना ‘बोधि पुस्‍तक पर्व’ इन दिनों पाठक, प्रकाशन और आलोचना जगत में काफी चर्चा में है. फेसबुक पर रामकुमार सिंह इस योजना में रायल्‍टी के सवाल पर बड़ी बहस कर चुके हैं. इसे पुस्‍तक जगत की नैनो क्रांति बताया है. इस योजना को आर्थिक व्‍यावहार्यता और रायल्‍टी जैसे सवालों के बीहड़ से निकलने के बाद सामग्री की गुणवत्‍ता के प्रश्‍न के तपते रेगिस्‍तान को लांघना होगा. वैसे बोधि प्रकाशन के मालिक कवि मायामृग अपने इस अनूठे विचार के परिणाम को लेकर काफी आश्‍वस्‍त हैं और इसकी खुशी को उनके चेहरे की लकीरों में देखा जा सकता है. पहले सैट में जिन लेखकों को शामिल किया गया है उनमें चंद्रकांत देवताले, विजेंद्र, नंद चतुर्वेदी, महीप सिंह, नासिरा शर्मा, हेमंत शेष, हेतु भारद्वाज, सत्‍यनारायण, प्रमोद कुमार शर्मा तथा सुरेंद्र सुंदरम हैं. मायामृग से पहली बार मिलना तो पहला सवाल ‘बोधि पुस्‍तक पर्व’ योजना की व्‍यावहार्यता को लेकर था. इसमें कोई संदेह नहीं कि जयपुर का यह युवा और अब तक ‘अननोटिस्‍ड’ प्रकाशक 15 साल के अपने प्रकाशक करियर में बदलाव के मोड़ पर है. टुरते फिरते उनसे बात की गई-

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प्रकाशक के रूप में यह कदम दुधारी तलवार पर चलने जैसा है. एक तरफ घर फूंक कर तमाशा देखने की नौबत तो दूसरी तरफ रायल्‍टी को लेकर आलोचकों का निशाना. लेकिन सैट के प्रति पाठकों व प्रकाशन जगत का शुरुआती रूझान बताता है वे एक पक्ष को साध गए हैं. रही बात रायल्‍टी, सामग्री की गुणवत्‍ता आदि की तो इस पर अभी चर्चा होनी है. अगर यह योजना सफल रहती है तो इसके दूरगामी परिणामों से इनकार नहीं किया जा सकता, न केवल मेरे लिए बल्कि प्रकाशन जगत के लिए भी.

आर्थिक रूप से व्‍यावहार्यता : आर्थिक रूप से व्‍यावहारिकता का सोच कर यह योजना शुरू नहीं की गई. लेखक और पाठक के रूप में सपना था जिसे पूरा करने की कवायद है यह योजना. लेकिन जिस तरह से पाठकों का समर्थन मिला है उसे देखकर लगता है यह आर्थिक व्‍यावहार्यता के मानकों पर भी खरी उतर जाएगी. सैट के लोकार्पण के पहले से हफ्ते में ही लगभग 925 सैट बिक गए. दूसरे संस्‍करण की बात भी शुरू हो गई है. सैट को गिफ्ट पैक में पेश करने का भी विचार है. हर साल इस तरह के दो सैट पेश किए जाएंगे यानी 20 लेखकों की किताबें.

……….

क्‍या गणित है : गणित और हिसाब किताब बणिया बुद्धि वाला मामला है. इस योजना में बुद्धि नहीं लगाई गई दिल से काम किया गया. लीक से हटकर काम करने का मन था जो किया गया है. आप पारं‍परिक प्रकाशक के रूप में सौ रुपये में दस किताबें बेचने की तो नहीं ही सोच सकते. निसंदेह रूप से घर फूंककर तमाशा देखने की स्थिति में भी मैं नहीं हूं. लेकिन कुछ बातें हैं जो इस योजना के पक्ष में है जैसे कि टाइपसेटिंग, डिजाइनिंग से लेकर प्रकाशन तक की सारी व्‍यवस्‍था मेरी अपनी है. इस लिहाज से लागत कई बार काफी कम हो जाती है. निसंदेह रूप से अगर यह योजना सफल होती है तो इसके इतर फायदे भी हमें मिलेंगे.

गुणवत्‍ता का पंछी : पहले सैट में आई दस किताबों की सामग्री और उनकी गुणवत्‍ता पर बहस तो अब शुरू होगी. अभी तक तो लोग इस योजना को लेकर ही आश्‍वस्‍त नहीं हो पा रहे हैं. जैसे जैसे किताब पाठकों तक पहुंच रही है, गुणवत्‍ता का पंछी उड़ने लगेगा. हमने अपनी तरफ से कोई समझौता नहीं किया है. बाकी समीक्षा, आलोचना तो अभी होनी है.

रायल्‍टी का पेंच : रायल्‍टी का सवाल गलत संदर्भ में उठाया गया अच्‍छा सवाल है. जब आप रायल्‍टी की बात करते हैं तो शर्त और नियमें भी तय होती हैं. दस रुपये मूल्‍य की किताब पर आप कितनी रायल्‍टी की उम्‍मीद करते हैं. हम पैसे लेकर किताब नहीं छाप रहे हैं. लेखकों ने रायल्‍टी नहीं लेने का अनुबंध किया है. हां अगर किताब की कीमत बढाते हैं तो उन्‍हें रायल्‍टी भी दी जाएगी. राजस्‍थान क्‍या पूरे भारत में लेखकों, प्रकाशकों की हालत किसी से छुपी नहीं है. पैसे लेकर किताबें कहां नहीं छापी जाती. बड़े बड़े प्रकाशक ऐसा करते हैं.

पता- बोधि प्रकाशन, तरू ऑफसेट एफ -77 सेक्‍टर 9, रोड न 11

करतारपुरा इंडस्ट्रियल एरिया बाइस गोदाम जयपुर 302066 फोन. 0141-2503989, 9829018087

अगर एक लाख रुपये में नैनो कार उपलब्‍ध कराना एक क्रांति मानी जा सकती है तो उससे बड़ी व सार्थक क्रांति हिंदी क्षेत्र में यह (बोधि पुस्‍तक पर्व योजना) है. हालांकि यह क्रांति सिर्फ हिंदी साहित्‍य संसार में हुई है इसलिए इसकी खबर शायद हिंदी के अखबार लेना जरूरी नहीं समझें.   – विष्‍णु नागर, एक समीक्षा में.

असल में क्रांति पाठक को सस्‍ती किताबें से नहीं होती। वो तो जमीन पर ही होती है। अपने दौर के महान लेखकों ने अपने समय में क्रांतियों में सक्रिय हिस्‍सेदारी ली। हम सौभाग्‍यशाली हैं कि लोकतंत्र में हैं। हम बयान तो दे सकते हैं। अखबार नहीं छापते हैं तो क्‍या हुआ। फेसबुक पर ही दें। छोटी सी आवाज भी अहमियत रखती है। – रामकुमार सिंह, रायल्‍टी के सवाल को उठाते हुए.

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Responses

  1. bahut badi kranti hai……….. kaash main bhi kitaabe.N le paati

  2. BHAI PRITHVI JI ,
    O KAM TO JORDAR KARIYO NI ! WAH !
    JHALTI RAKH ME SYUN ROTIYO KADH LYAYA ! IN NE E TO KEVE BHOBHARIYO ROTTO !
    ABBE KLHAO LOG CHOOR-CHOOR !
    GHEE -SHAKKAR GHALDI MAYAMRIG !
    ABBE BICHH C KANKAD PAR SAHITY RE PANDITAN RI JAZAM !

  3. naman hai maya mrig jee ko jo pustako ki dunia me kranti laa di , krati har kisi ke liye achchi nahi hoti , kisi ka oodhar kar deti hai to kisi ke liye vicharnia prasnan , maaya mrig jee ne aam pathak ko dhayan me rakh ye karanti laaye hai , magar anya prakashano ke liye sir dard bane gaye ho qki ve yehi kitabe el laagat pe chapte , jo mouka oonke haath se nikal gaya hoga . kher .. maya mrig jee ko naman,

  4. संभव हो तो ये किताबें हमें भी भिजवा दिजिए।
    बड़ी अच्छी बात है।

    आभार

  5. बोधि पुस्‍तक पर्व एक महत्‍वाकांक्षी योजना है, पाठकीय दृष्टि से। मैं इसें एक प्रकाशकीय भूचाल की संज्ञा से अभिहित करना चाहूंगा। दस पुस्‍तकों में अगर पांच पुस्‍तकें भी गुणवत्‍ता की कसौटी पर खरी उतरें तो हर्ज क्‍या हैं,। कभी-कभी तो हम नामी बडे प्रकाशक की एक किताब 300-450 रूपये में वीपीपी से मंगाते हैं, और गुणवत्‍ता के मायने में ठगे जाते हैं। ऐसे में 100 रूपये में 10 पुस्‍तकों की योजना का स्‍वागत करना एक दायित्‍व बन जाता है। रही बात लेखक को रॉयल्‍टी की, भाई यह मसला अभी हिंदी साहित्‍य की अदालत में विचारधीन है, जहां हाथ रखो वहीं दर्द है। बात न छेड़ो तो ही ठीक है। बोधि का अनुबंध कोई घाटे का सौदा नहीं है लेखकों के लिए।

    http://www.bodhiprakashan.blogspot.com पर 80 पृष्‍ठ की किताब आपको 35 रूपये में भी दिखाई देगी, और ऐसा बोधि प्रकाशन काफी पहले से ही कर रहा है, क्‍या यहीं भी कुछ मीन मेख निकाला जाएगा।

  6. Prithvi Bhai
    aapke Sneh ke liye Abhar
    -maya

  7. Sanehi Shradha, Kagad, Dula Ram, Lalit, Sunil Gajjani… sabhi mitron ke prati aabhari hoon. Aapkke uatsah aur sahyog se hi yojna safal hogi.

  8. I salute to the great initiative by Maya Mrig publisher of Bodhi publication.

  9. अच्‍छी शुरूआत, निश्‍चय ही साहित्‍य और प्रकाशक जगत दोनों को इससे फायदा होगा। मैं सोचता हूं कई बार लेखक को रायल्‍टी से अधिक पाठकों तक अपनी पहुंच बनाने के लिए बिना मूल्‍य के भी लिखना पड़ता है। अगर यह येाजना हिट रही तो नए लेखकों के लिए भी रास्‍ते खुलेंगे। बड़े लेखकों के साथ नवोदित को सैट में शामिल करने का लाभ प्रकाशक और नए लेखक को मिलेगा…. हां स्‍थापित लेखकों को उदार दिल होना पड़ेगा।

    खैर, देखते हैं अभी तो शुरूआत है और अच्‍छी शुरूआत है… इससे रूबरू कराया इसके लिए दिल से धन्‍यवाद…

  10. Respected Mayamarig ji ko is navaachaar ke liye badhaiyaan!!!!!!!!!!!!
    unka prayas sahitya jagat ke naye aayam rachega. mahangi kitabein kai baar pathakon se marhoom rahti hain magar yahan saubhagya se ulta hoga.
    prithviji ko bhi aalekh ke madhyam se Mayamarig ji ko hamare vichaar pahunchane ke liye shUkriya!!!!!!!!

  11. bahut achha kar rahe hai aap… matlb maya aur aap.. badhai…

  12. Delhi main Bodhi Pustak Parv ka Set KITAB GHAR Prakashan par jaldi hi uplabdh ho jayega.
    Kitabghar ke Manoj ji ka Mob. No. Hai- 09811175085

    KITAB GHAR PRAKASHAN
    24/4855, DRIYAGANJ, NEW DELHI-2

  13. bodhi prakashan ki ye yojna wakai neno kranti hi to h.

  14. 100 रूपये में 10 पुस्‍तकों की योजना का स्‍वागत करना एक दायित्‍व बन जाता है।

  15. Dhanyavad mitro

  16. भाई मायामृग, पहले तो पृथ्वी के माध्यम से औपचारिक बधाई स्वीकार करें। मैंने बधाई को औपचारिक क्यों कहा है, उसका कारण स्पष्ट कर दूं। आपने बोधी शब्द पर्व के माध्यम से जो काम किया है वह बधाई के लायक है ही नहीं। पर जब सब लोग बधाई दे रहें हैं तो मुझे मज़बूरी में देनी ही पड़ेगी। आपने जो काम किया है उसके लिए तो मैं आपको सामने खड़े हो कर सल्यूट करना चाहता हूं। जिस जमाने में साठ पेज की एक खाली कॉपी तक पच्चीस रूपए में आती हो, उस दौर में आपने अस्सी-नब्बे पेज की एक पूरी साहित्यिक पुस्तक मात्र दस रूपए में उपलब्ध करवा दी। (जादूगर हो गए हो)

    आपने बता दिया है कि महज अच्छी कहानियां या कविताएं लिख कर ही साहित्य सेवा नहीं की जा सकती एक तरीका ये भी है। अभी जब जयपुर आया था तो हसरत ही रह गई कि आपसे मिलता। कारण वही पुराना हैं शहर बड़ा है और समय कम। (सोचता रहा हूं सभी दोस्तों को ले कर किसी और ग्रह पर शिफ्ट हो जाऊं जहां दिन कम से कम तीस घण्टे का हो।) अब आपके माध्यम से एक धन्यवाद बड़े भाई मोहन आलोक को भी, जिनके सौजन्य ये आपका ये अनूठा सैट मिल सका। शेष मिलने पर। सल्यूट उधार रहा फिलहाल बधाई से काम चला लें।

  17. Bhai K. Vrihaspati
    aapke sneh ke liye samman. Is bar jaipur aayen to jroor milen. Yojna ke bahane hi sahi… purane mitar milen…

  18. ase waqat jab aam pathak kitabo ki badhati kimato ke karan kitaboo se door hota ja raha h asse samay me bhai MM ka ye paryash sarahniye h, shaduwad ke patra hai.

    vinod nokhwal
    pilibangan

  19. AApke sneh ke liye aabhari hoon Vinod bhai..Yeh pyar hamesha bana rahe..

  20. राम-राम सा पृथ्वी जी और माया मृग जी,
    आपरो भागीरथी ओ पण दुस्साहसी कदम कम-सूं-कम राजस्थानी प्रकाशकों री अंख्या तो खोलेला हिज. एडी महरी आशा है. इण भागीरथी काम सूं जुड़ न सबाँ ने ख़ुशी ही होगी, सो बेझिझक अर्ज करजो.
    आपरो,
    पुखराज जाँगिड़.

  21. Dhanyavad Bhai Pukhraj ji…aapka sahyog aur sneh bana rahe…

  22. Hindi ke sammaan ke sath sath, Yah HIND ka sammaan hai !

  23. 100rs mai kitab ka set sun kar biswas nhai ho rha hi.magar ye shach hai.to baki sab parkasan wale apni kitabo ka kya karge.kyuki aj ki date me 100rs me ek kitab nhai milti. bodhiparkasan 10 kitabe de rha hai.mari sabi logo se ya gojarise hai .is awsar ko hat se na jane de.kitab jaror le.


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