Posted by: prithvi | 06/02/2010

थार की ढाणी

‘थार की ढाणी’ का विमोचन

नई दिल्‍ली. राजस्‍थान की ढाणियों व लोकजीवन पर लिखी गई किताब ‘थार की ढाणी’ का विमोचन यहां विश्‍व पुस्‍तक मेले में हुआ. जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र के प्रोफेसर रामबक्ष ने इसका विमोचन किया.

पृथ्‍वी द्वारा लिखित ‘थार की ढाणी’ में राजस्‍थान की ढाणियों, वहां के लोगों व लोकसंस्‍कृति पर प्रकाश डालने का प्रयास किया गया है. इसमें बताया गया है कि किस तरह ढाणियां राजस्‍थान के लोकजीवन का अभिन्‍न अंग हैं. इसके बहाने थार की विकटताओं तथा सौंदर्य पर भी इस पुस्‍तक के विभिन्‍न अध्‍यायों में प्रकाश डाला गया है.

प्रोफेसर रामबक्‍श ने इस किताब को थार के लोक जीवन व लोकसंस्‍कृति पर आरंभिक किताब बताया और इसी दिशा में कुछ और किताबें लिखे जाने की आवश्‍यकता जताई. उन्‍होंने कहा कि थार की लोकसंस्‍कृति पर बहुत कुछ लिखा जाना बाकी है.

पुस्‍तक थार की ढाणी का विमोचन करते प्रोफेसर रामबक्ष व प्रकाशन विभाग की अवर महानिदेशक वीणा जैन.

इस अवसर पर वरिष्‍ठ लेखक, पत्रकार राजकिशोर तथा नेहरू युवा केंद्र के उपनिदेशक भुवनेश जैन ने भी ‘लोक संस्‍कृति और वैश्‍वीकरण’ विषय पर अपने विचार रखे. साथ ही उन्‍होंने इस तरह की और किताबें लिखे जाने की बात की.

प्रकाशन विभाग के निदेशक राजेश झा ने कहा कि यह अपनी तरह की अनूठी व लीक से हटकर पुस्‍तक है. उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि पाठक इसे पसंद करेंगे.

इस किताब का प्रकाशन भारत सरकार के प्रकाशन विभाग ने किया है. प्रकाशन विभाग की अवर महानिदेशक वीणा जैन ने कहा कि ढाणी राजस्‍थान की सामाजिक संरचना की सबसे छोटी इकाई है और यह किताब इसी को केंद्र मानते हुए पूरे परिवेश तथा उसके बदलावों की बात करती है. उन्‍होंने कहा कि पुस्‍तक में ढाणी के बहाने राजस्‍थान के लोकजीवन की चर्चा की गई है. थार की परंपराओं और बदलावों के विभिन्‍न पहलुओं को इसमें समेटा गया है.

थार की ढाणी, प्रकाशन विभाग तथा बिक्री केंद्रों के बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर यहां भी ली जा सकती है.

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Responses

  1. good

  2. ढाणियों का अपना महत्त्व है..गाँव से दूर सुदूर में ढाणी में सब कुछ जुटा पाना कितना मुश्किल है,इसका जीता जागता उदहारण है ये ढाणियां…! प्रकाशन पर मेरी शुभकामनायें…

  3. बधाई हो, यदि आप डिजिटल कापी पुस्तक की उप्लब्ध करा सके तो मेहरबानी होगी, एक बात और हेडर में फ़ोटो बहुत खूबसूरत है, आप ने खींचा?

  4. बेसब्री से इंतजार था, बधाई हो. कापी कब भिजवा रहे हैं.

  5. पृथ्‍वी जी किताब की बधाई। मुझे पता नहीं यह आपकी पहली पुस्‍तक है या आप पहले भी कोई किताब लिख चुके हैं लेकिन जो भी है थार के रेगिस्‍तान के बीच बसी ढाणियों पर आपका लिखा नि:संदेह अद्भुद होगा। यह बीकानेर में कब तक उपलब्‍ध हो सकेगी।

    इसका इंतजार रहेगा।

    एक बार और बधाई स्‍वीकार करें विश्‍व पुस्‍तक मेले के दौरान इसके विमोचन के लिए…

  6. बेहतर…

  7. बहुत बहुत बधाई. आपसे बड़ी उम्‍मीदे हैं.

  8. पहली पुस्‍तक के प्रकाशन पर बधाइयां…ढेर सारी बधाइयां!

  9. बहुत बहुत बधाई…. प्रकाशन पर मेरी शुभकामनायें…

  10. पृथ्‍वी जी, आपको बधाई. किताब लिखने के लिए और इतने अच्‍छे विषय पर लिखने के लिए. थार की ढाणियों के बारे में और जानने की जिज्ञासा के साथ

  11. ‘थार की ढ़ाणी’ निश्‍चय ही आपका स्‍तुत्‍य प्रयास है। तहे दिल से बधाई स्‍वीकारे।

  12. बधाई हो. ये जानकारी मेरे अपने दोस्‍तों तक भी देना चाहता हूं.

  13. बधाई हो.nice

  14. नई किताब आने पर बहुत बहुत बधाई हो.

  15. पृथ्‍वी जी आपको बहुत बहुम बधाई ..

  16. PRITHVI G,
    Congratulation and thanks for bringing the lives of Rajasthani DHANIS in the notice of people.

    ISHWAR WITH
    AMARPAL SINGH BRAR
    RAKESH BHADU

  17. It is really a wonderful movement when myou touched the soul of indian culture .these are few places which are conservating the old custum and traditions.this is a valuable document on culture custum and tradition.a lot of congratulations.

  18. पुस्‍तक प्रकाशन पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं.
    – विशेष

  19. congrats. I have read this book. Subject is amazing.

  20. congratulation, prithvi ji…

  21. Dher saari subhkamnaye..

  22. prithvi ji, ek achhi pustak ke liye badhai. dhani thaar ki or vaani[bhasha] bhi whin ki shayad ye sahjta pustak ko pathniya banati hai. aap agar riportaj ki shakl me kuchh rachen to mere saath-saath pathakon ko suhaye ga.


कुछ तो कहिए..

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