Posted by: prithvi | 03/08/2009

सेम व धोरे!

सूरतगढ़ से बड़ोपल जाने को एक सड़क निकलती है. पूर्व की ओर! यह सड़क अनेक गांवों से होती हुई रावतसर पर नए बने राष्‍ट्रीय राजमार्ग या नेशनल हाईवे पर जा मिलती है.

सूरतगढ से रावतसर जाने को यह कोई मुख्‍य या अच्‍छी सड़क नहीं है. फिर भी दूरी अपेक्षाकृत कम होने के कारण लोग आजकल इसे इस्‍तेमाल करने लगे हैं. सूरतगढ़ से निकलने के बाद मानकथेड़ी, बड़ोपल, 18एसपीडी (रतीरामवाला), जाखड़ांवाली, चक सुथारांवाला, मोधूनगर, भैंरूसरी, भाखरांवाली और रावतसर… कमोबेश इसी क्रम में गांव या चक आते हैं.

सूरतगढ़ से निकलते वक्‍त धोरों की एक मेर है और उसके बाद दूर दूर तक पसरी सेम (जल रिसाव, जलभराव, वाटरलागिंग) और कल्‍लर यानी नमकीन चिकनी मिट्टी के कारण अनुपजाऊ हुई जमीन. पिछले कुछ दशकों में इस सेम के कारण हजारों एकड़ जमीन देखते ही देखते दलदल या बंजर में बदल गई. इस सड़क से जाते हुए विकास के इस विनाश को व्‍यापक रूप में देखा और महसूस किया जा सकता है. यह क्रम बड़ोपल से ठीक पहले से लेकर रावतसर के बाद तक जारी रहता है. क्रम धोरों या रेतीली जमीन से शुरू होता है और वहीं जाकर समाप्‍त हो जाता है..

बड़ोपल से लेकर रावतसर तक एक बडे़ इलाके में सेम या जलरिसाव ने जमीनों को दलदल में बदल दिया है.

बड़ोपल से लेकर रावतसर तक एक बडे़ इलाके में सेम या जलरिसाव ने जमीनों को दलदल में बदल दिया है.

एक विशालकाय सेमनाला भी है और अब नाम के बचे खेतों में बने छोटे छोटे सेमनाले भी.. दूर दूर तक पसरी सफेद जमीन, या दलदल यहां देखी जा सकती है. भैरोंसिंह शेखावत जब मुख्‍यमंत्री थे तो एक बार इस इलाके में आए थे. सेम के निराकरण की अनेक योजनाएं बनी लेकिन शायद कारगर एक भी नहीं हुई. कहते हैं कि इस इलाके में कुछ फीट नीचे जिप्‍सम की परत है. पानी वहां जाकर रूक जाता है और दलदल का रूप ले लेता है. विशेषकर थार की आधुनिक गंगा यानी राजकैनाल के आने के बाद तो हालात बदतर हो गए हैं. आंकड़े बताते हैं कि नहर प्रणालियों से जल रिसाव के कारण उपजी सेम से राजस्‍थान और पंजाब में लगभग 85,000 हेक्‍टेयर भूमि अनुपजाऊ हो गई है. कई गांव सेम की डूब में आकर उजड़ गए हैं या उजड़ने की कगार पर हैं. सेम या शेम!

यही थार है जहां एक ओर बालुई रेत का समंदर धोरों या टीलों के रूप में पसरा है तो दूसरी ओर सेम जैसी समस्‍याएं दलदल के रूप में सामने आ रही हैं.

रावतसर में नेशनल हाइवे के बाद थोड़ा मुड़कर इस सड़क पर बना रहा जा सकता है. रावतसर से यह सड़क नोहर भादरा की ओर जाती है. चाइया, थालड़का, टोपरियां, भगवान, देइदास, भूकरका, नोहर, रामगढ़, करणपुरा, सीकरोड़ी, भादरा, डोबी, पचारवाली, उत्‍तरादा बास और आगे … तक यह सड़क चली जाती है. इसी सड़क पर नाथ संप्रदाय का एक प्रमुख गढ़ और लोकदेवता गोगा जी का मंदिर गोगामेड़ी में है. मेड़ी यानी छोटा मंदिर.

वैसे गांवों की पहचान कुछ और कारणों से भी होने लगती है. जैसे किसी ने बताया कि रामगढ़ बलराम जाखड़ का ननिहाल है, भूकरका कभी फुटबाल के लिए विख्‍यात रहा है. नोहर एशिया में चने की सबसे बड़ी मंडी रहा है, परलीका राजस्‍थानी साहित्‍य का आधुनिक गढ़ है, मोधूनगर पीलीबंगा से मौजूदा विधायक का गांव है.. यह विश्‍लेषण लगभग हर गांव कस्‍बे या शहर के साथ जोड़कर देखा जा सकता है.

ग्रेफ की यह सड़क कुछ स्‍थानों पर काफी बुरी स्थिति में है फिर भी एक लंबे क्षेत्र को समेटती है!

(Tags: Parlika, Bhukrka village, Nohar, Pilibangan, Kalibangan, Ramgarh, Bhadra, Gogamadi, Utradabaas, Sikrodi, Pacharwali, Dobi village, Nath samprday, Badopal, 18SPD, Bhagwan, Daidas village, Manakthedi, Rangmahal village, Bhairunsari, Rawatsar, Rawla, Gharsana, Anup Garh, SuratGarh, Modhunagar, Chak Sutharanwala, Ratiram wala, water-logging in rajasthan )

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Responses

  1. जानकारी पूर्ण आलेख है।आभर।

  2. Thanx for writing on water lodging of Rawatsar area

  3. thnx for putting the data on internet plz put the light on some problems like broken bridges of jlabana to 18spd

  4. Its pleasure to see the knowledge about water logging problem ….thnx

  5. thanks pure vivrn ke liye


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