Posted by: prithvi | 10/03/2009

कोई विकल्‍प नहीं है रंगों का

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कोई विकल्‍प नहीं रंगों का
जीवन में रंगों का कोई विकल्‍प नहीं है. शुक्र है! यह बहुत बड़ी बात है. रंगों का कोई विकल्‍प नहीं होता. रंग के साथ भंग (भांग) हो तो दुनिया नशीली हो जाती है. नशा रंग का होता है या भांग का, पता नहीं लेकिन यह सच है कि रंग अपने आप में बड़ा नशा है. होली पर धमाल गाने वाले हर किसी ने भंग नहीं पी होती. वे तो रंग रसिया होते हैं. रंगों के रसिया, झूमते हुए. उनके नशे की मादकता के आगे क्‍या भंग और क्‍या और.

तो नशा रंग का होता है. रंग जीवन है. प्रकृति मां ने हमें जीवन के हर मोड़, हर पल के लिए रंग दिए हैं. ये हमारे ही आसपास बिखरे रहते हैं. बालकनी में लगे कढीपत्‍ते के पत्तियों, बेटी की भूरी आंखों, प्रेमिका के सपनों, गली के पीपल, राठी गाय की लाली या तनी पर सूखती चूनर के रूप में. हमें बस उन्‍हें देखना होता है, रंग हो जाएगा, होली हो जाएगी, नशा होगा और उल्‍लास आएगा. यही जीवन है और यही हमारे होली जैसे पर्वों का सार है.

सामूहिकता, उल्‍लास, नशा (नशे वाला नहीं, मदहोशी या मादकता वाला). ये सब तनाव कम करते हैं और नई ऊर्जा रंगों में डालते हैं. जादू की झप्‍पी इसी को तो कहते हैं.

अच्‍छा है कि रंग हैं और उनका कोई विकल्‍प नहीं है. आसमान के नीले, सूरजमुखी के पीले, कपास के सफेद या भूरे, गेहूं की हरी पत्तियों, मोगरे के सफेद फूलों .. इन सब पर कोई और रंग चढता ही नहीं है. ये तो पक्‍का रंग है. चढ गया सो चढ गया. शुक्र है, अगर ये रंग भी कच्‍चे होते तो शायद जीना और कठिन हो जाता. कई बार कल्‍पना करते हैं कि हमारे सारे हरे हरे पेड़ पौधे काले या सफेद हो गए हैं. सिहर जाते हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए. इनकी हरीतमा जीवन में गीलापन, हरावट देती है. वरना तो लोग डब्‍बों में कारतोल, काला रंग लिए घूम रहे हैं पोतने के लिए. अच्‍छा है कि वे हमारे सपनों पर अपने रंग नहीं पोत पाते. शुक्र है कि होली के हमारे रंग इनसे बचे हुए हैं.

image0081कुछ पंक्तियां हैं …

पीली चूनर
और नीला आसमान
शहतूत की हरी पत्तियां
गेंदे के फूल लाल
बेटी की भूरी आंखें
सपने ज्‍यूं थाल गुलाल.

इतने सारे, पक्‍के रंग
जिन पर नहीं चढ़ता
और कोई रंग.

विकल्‍पहीन होती दुनिया में
रंगों का भी कोई विकल्‍प नहीं.
शुक्र है!

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Responses

  1. होली की ढेर सारी शुभकामनायें…..

  2. विकल्‍पहीन होती दुनिया में
    रंगों का भी कोई विकल्‍प नहीं.
    शुक्र है!
    बहुत सुंदर.और मरुभूमि के बाशिंदों से ज्यादा चटख रंगों को कौन समझ सकता है?

  3. ram ram sa,
    tharo blog mhare papaji or mhe bhi dekhyo. bhot suni khechal kari hai sa. papaji keyo ho ke abaar to exam me duty re karan blog puro ni dekh payo hu. fursat me tharo blog dekhsyu.

    aapro hetalu
    ajay kumar soni
    parlika


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