Posted by: prithvi | 23/11/2011

बीच सफर दर्द का झोंका

उतरते का‍ती की रात का पिछला पहर है. चांदनी, कपास के फोओं सी खिली है और सर्दी सरसों की ताजा पौधों की तरां हमारे मौसम खेत में उगने लगी है. इस साल बारिश खूब हुई तो सर्दी-धुंध भी अच्‍छी खासी होगी. पकाव पर आए धान के खेतों से मदहोश करने वाली खुश्‍बू ठंडी रातों में आती है. खेतीबाड़ी, किसानी के उल्‍लासित करने वाले दिन और सपनों की पग‍डंडियों पर ले जाने वाली नम रातें हैं.

खैर, ऐसी ही रातों में अगर जाड़ या दाढ़ में दर्द हो तो सारा सौंदर्य शास्‍त्र बेमानी हो जाता है. बीच सफर में इस तरह के दर्द की कल्‍पना भी नहीं की जा सकती. दिल्‍ली से निकल कर सूरतगढ़ ही पहुंचा कि जाड़ में दर्द शुरू हो गया. बायसूल (पसली), बाय/बाव, कान और जाड़ दर्द के खौफनाक किस्‍से बचपन से सुने/देखे थे. कहते हैं कि दर्द सहने की मनुष्‍य की जो अधिकतम सीमा है उससे कहीं अधिक दर्द महिला प्रसव के दौरान सहन करती है. अब अपन को लगता है कि जाड़/दांत के दर्द को भी इस श्रेणी में रखा जाना चाहिए. यह दर्द हमें समझा देता है कि दर्द वास्‍तव में किस बला का नाम है और उस बला को आप कितना झेल सकते हैं. आपमें कितना दम है.

बा‍बा कई साल से कह रहे हैं कि दांत लगवा दो. नहीं कर पा रहा. कई बार समय नहीं होता. कई बार वे घर पर नहीं होते. कई बार हमारे बीच कुछ नहीं होता. बाकी सब सो रहे थे तो बाहर सीढि़यों पर अपने दर्द को पीने की कोशिश करते समय बाबा बहुत याद आए. बच्‍चे कितने भी बड़े हो जाएं दर्द के समय मा/बाबा ही याद आते हैं. यहीं से शायद नानी याद आने लगती है.

तो, दर्द अक्‍ल जाड़ में था. शक्‍करपारे खाने से अचानक उठा और घंटे भर में पूरा जबड़ा टीस मारने लगा. अगले घंटे में तो ऐसा लग रहा था कि इक दरिया है और दर्द की लहरें इसे तोड़ने पर आमदा हों. ऐसा दर्द बहुत से अच्‍छे/बुरे कामों की याद दिला देता है. आपको कई दवाओं के नाम भी याद हो जाते हैं. डाइक्‍लोमॉल की दो गोलियां लीं जिसे दर्द के बल्‍लेबाज ने फुलटॉस बनाते हुए सीमारेखा से बाहर भेज दिया और अपने पास बैठकर कुछ अच्‍छी यादों को रिपीट करने के अलावा कुछ नहीं था. कहते हैं कि अच्‍छे लोगों के बारे में सोचना भी दर्द को कम कर सकता है. यह दवा अंतत: काम कर करती है, सकारात्‍मक ऊर्जा देती है और दर्द के हिमशिखर पिघलने लगते हैं. यह और बात है कि तब तक साढे चार बज चुके थे और रात अपनी महफिल समेट रही थी.

(painting- Alley By The Lake by Leonid Afremov from net)


Responses

  1. Beautiful painting, उतरते का‍ती की रात & दाढ़ में दर्द..
    good combination.I like it.
    - dinesh bansal, sri ganganagar


कुछ तो कहिए..

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Connecting to %s

श्रेणी

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 46 other followers